नव निर्वाचित एम एलसी विक्रांत सिंह रिशु के आगे नहीं चली राजनीतिक दलों की गणित

ना सत्ताधारी दल का उम्मीदवार जीता न विपक्ष का जीत हुई तो निर्दल उम्मीदवार की आजमगढ़ -मऊ स्थानीय प्रधिकारी विधान परिषद चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार है तो वही उसने अरुण कान्त यादव को मैदान मैदान में उतारा था जो की इस चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे। वही आजमगढ़ और मऊ मिला कर सपा के बारह विधायक और सपा गठबंधन से एक विधायक है । सपा ने आजमगढ़ - मऊ की सीट पर अपने वर्तमान विधान परिषद सदस्य राकेश यादव पर दाव लगाया था। मगर निर्दल उम्मीदवार रिशु सिंह ने पटखनी दे दी। आजमगढ़ में सपा का गढ़ माना जाता है और जिस तरह से सपा ने विधान सभा चुनाव में आजमगढ़ और मऊ मिला कर बारह विधान सभा की सीटे जितने में कामयाब रही थी तो वही भाजपा का आजमगढ़ में सुपड़ा साफ हो गया था और मऊ में उसे एक मात्र सीट मिली थी । स्थानीय प्रधिकारी चुनाव में प्रदेश में भाजपा सरकार और एक विधायक होने के बावजूद भी भाजपा अपने उम्मीदवार को नहीं जीता सकी तो वही सपा के बारह विधायक भी अपने उम्मीदवार को जिताने नाकामयाब रहे।भाजपा और सपा को पटखनी देते हुए निर्दल उम्मीदवार विक्रांत सिंह रिशु ने विधान परिषद चुनाव में बड़ी जीत हासिल की। वही निर्दल उम्मीदवार की जीत के बाद दोनो ही राजनीतिक दल चिंतन में लगे हुए है आखिर इतनी बुरी हार कैसे मिली।

