तुम कहां चल दिए रवीश.........





कल 14 अप्रैल को माने जाने वस्त्र व्यवसायी व भारत विकास परिषद के पूर्व कोषाध्यक्ष बहुमुखी प्रतिभा के धनी, हंसमुख रवीश तिवारी कोरोना के कहर से काल के गाल मे समा गए। उन्हें याद कर लोग सिहर उठते है, किसी को इस अनहोनी पर भरोसा ही नहीं हो रहा। आज इनका जन्मदिन है, कुछ दिन पूर्व उन्होंने अपनी आखिरी रचना लिक्खी थी हम सभी उनके जन्मदिन पर उनकी ये रचना उन्हें समर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते है। 
तुम कहां चल दिए रवीश.........
धुंधली रौशनी
उबड़-खाबड़ रास्ते
चिलचिलाती धूप
सुखातीं पश्चिमी हवाएं
इन सबको साथ लेकर
मैं चल पड़ा हूं राह पर


फटे होंठ
बिखरे बाल 
निराश आंखें 
और सूखते गाल 
इन सबको साथ लेकर 
मैं चल पड़ा हूं रहा पर 


बोझिल रिश्ते 
अबूझ भाव 
चिढ़ातीं भंगिमाएँ 
और खंडित प्रतिमाएं 
इन सबको साथ लेकर 
मैं चल पड़ा हूं राह पर


टूटा दिल
बिखरे जज्बात 
अधूरे ख्वाब 
और नाकाम हसरत 
इन सबको साथ लेकर 
मैं चल पड़ा हूं राह पर


ना चांद न चांदनी 
न सूरज ना रौशनी
न ख़्वाब न मंजिल 
न हसरत न हासिल 
न कुछ खोने को 
न कुछ पाना था 
रास्ते से एक वादा था 
और वह वादा निभाना था 

उस वादे को साथ लेकर 
मैं चल पड़ा हूं राह पर 
मैं चल पड़ा हूं राह पर ।।


रवीश



अन्य समाचार
फेसबुक पेज
<< महिला ऐच्छिक ब्यूरो के सदस्यों के प्रयास से दो दंपति साथ-साथ रहने को हुए तैयार
मऊ में 19 लोगो को किया गया जिला बदर >>