मऊ में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुआ दुर्गा विसर्जन





विजयादशमी के अवसर पर नगर के दसई पोखरा स्थित मैदान का विशाल मेले का आयोजन किया गया था साथ राम व रामायण युद्ध के बाद जहां भगवान रामचंद्र ने रावण का वध किया वही सांकेतिक रूप में रावण का पुतला दहन किया गया जिसको देखते हुए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किये गए थे। वही रावण दहन के बाद रात्रि में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन का जुलूस निकाला गया जो आजमगढ़ मोड़ होते हुए शीतला माता मंदिर पहुंचा। जहां भगवान रामचंद्र ने मां दुर्गा की आरती की और दुर्गा पूजा  महासमिति द्वारा दुर्गा प्रतिमाओं को क्रमबद्ध कर नंबर उपलब्ध कराया गया। जहां से दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए धीरे धीरे आगे बढ़ी और मिर्जाहादिपुरा होते हुये शहर के बीचोबीच औरंगाबाद संस्कृत पाठशाला सदर चौक सिंधी कॉलोनी बाल निकेतन अंधा मोड़ होते हुए भीटी स्थित तमसा नदी में मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। दुर्गा विसर्जन को देखते हुए जहां शहर के अंदर आने जाने वाले वाहनों पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी गई थी। तो वही सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। पुलिस अधीक्षक सुशील घुले स्वयं पूरी व्यवस्था की मानिटरिंग कर रहे थे। तो वही हर एक प्रतिमा सुरक्षित रूप से तमसा नदी में विसर्जित कर दी जाये। इसे देखते हुए हर प्रतिमाओं के पीछे सुरक्षाकर्मी लगाए गए थे वही पुरा नगर जगह जगह मां दुर्गा के दर्शन के लिए उमड़ पड़ा था।  लोग नाचते गाते हुये दुर्गा विसर्जन का जुलूस धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया। दुर्गा विसर्जन जुलूस को देखते हुये रैपिड एक्शन फोर्स,पीएससी सिविल पुलिस लगाए गए थे। साथ ही बड़ी संख्या में थानाध्यक्ष, क्षेत्राधिकारी साथ ही मजिस्ट्रेट सकुशल दुर्गा प्रतिमा विसर्जन करने के लिए पूरी मुस्तैदी के साथ लगे हुये थे। वही दुर्गा प्रतिमा विसर्जन में शामिल लोगों के लिए नाश्ता पानी चाय की व्यवस्था की गई थी। ताकि प्रतिमा विसर्जन में शामिल लोगों की सेवा की जा सके वही लगे  स्टालों में हिंदुओं के साथ साथ मुस्लिम बंधुओं ने भी दुर्गा प्रतिमा विसर्जन में शामिल लोगों के लिए नाश्ते की स्टाल लगाए हुये थे।



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